Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 24th Feb 2026

    काली घटाओ चुप रहो!

    बंद हैं सब मय-कदे साक़ी बने हैं मोहतसिब,ऐ गरजती गूँजती काली घटाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई

  • 24th Feb 2026

    रात का पत्थर!

    रात का पत्थर न पिघलेगा शुआ’ओं के बग़ैर,सुब्ह होने तक न बोलो हम-नवाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई

  • 24th Feb 2026

    तुम पुकार लो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में खामोशी फिल्म का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने इसे अपने ही संगीत निर्देशन में गाया था- तुम पुकार लो, तुम्हारा इंतज़ार है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 24th Feb 2026

    तुम पुकार लो, तुम्हारा इंतज़ार है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में खामोशी फिल्म का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने इसका संगीत दिया था और इसको गाया भी था- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 24th Feb 2026

    अपने तमाशाइयों में हूँ!

    ख़ुद ही मिसाल-ए-लाला-ए-सेहरा लहू लहू,और ख़ुद ‘फ़राज़’ अपने तमाशाइयों में हूँ| अहमद फ़राज़

  • 23rd Feb 2026

    निरज-निर्भय -आशु कविता

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय निर्भय हाथरसी जी की एक आशु कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उन्होंन अपने और नीरज जी के संबंध में प्रस्तुत की थी- आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

  • 23rd Feb 2026

    तू हँस रहा है मुझ पे!

    तू हँस रहा है मुझ पे मिरा हाल देख कर,और फिर भी मैं शरीक तिरे क़हक़हों में हूँ| अहमद फ़राज़

  • 23rd Feb 2026

    न तुम हमें जानो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- ‘बात एक रात की’ का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने अपने ही संगीत निर्देशन में गाया था- न तुम हमें जानो, न हम तुम्हे जानें, मगर लगता है कुछ ऐसा! आशा…

  • 23rd Feb 2026

    देखिये न मेरी कारगुज़ारी!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार, कवि और संपादक स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अज्ञेय जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है अज्ञेय जी की यह अलग किस्म की कविता– अब देखिये न मेरी कारगुज़ारीकि मैं मँगनी…

  • 22nd Feb 2026

    तिरी ख़्वाहिशों में हूँ!

    मुझ से बिछड़ के तू भी तो रोएगा उम्र भर,ये सोच ले कि मैं भी तिरी ख़्वाहिशों में हूँ| अहमद फ़राज़

←Previous Page
1 … 167 168 169 170 171 … 1,524
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar