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सूरज पर अभियोग!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- वादीगण जब सूरज पर अभियोग लगाएंगे,साक्षी बनकर आंख मूंदकितने जन आएंगे। कितनों से दुश्मनी सदा यहलेता रहता है,बिन मांगे हर जगह रोशनी देता रहता है।यह पहले ले जान कहाँरोशनी अवांछित हैकितने सारे कृत्य इसी सेहोते बाधित हैं। मौका पाकर सब अपनेमसले सुलझाएंगेपूरे मन से…
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एक चश्मा हुस्न का!
फूट निकलेगा जबीं से एक चश्मा हुस्न का,सुब्ह उठ कर ख़ंदा-ए-सामान-ए-क़ुदरत देखिए| जोश मलीहाबादी
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आदमियत देखिए!
ये भी कोई बात है हर वक़्त दौलत का ख़याल, आदमी हैं आप अगर तो आदमियत देखिए| जोश मलीहाबादी
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सिर्फ़ इतने के लिए!
सिर्फ़ इतने के लिए आँखें हमें बख़्शी गईं,देखिए दुनिया के मंज़र और ब-इबरत* देखिए|*Learn From It जोश मलीहाबादी
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मुस्कुरा कर इस तरह!
मुस्कुरा कर इस तरह आया न कीजे सामने,किस क़दर कमज़ोर हूँ मैं मेरी सूरत देखिए| जोश मलीहाबादी
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मेरी ज़रूरत देखिए!
आप इक जल्वा सरासर मैं सरापा इक नज़र,अपनी हाजत देखिए मेरी ज़रूरत देखिए| जोश मलीहाबादी
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आज अपने आंगन में धूप है उजाला है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ स्वर्गीय इंदुमति कौशिक जी की यह सुंदर रचना- टांग दूं अरगनी पर अनधुली उदासी मैं,आज अपने आंगन में धूप है उजाला है। आशा है आपको यह रचना पसंद आएगीधन्यवाद।
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मेरा यूट्यूब चैनल
मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने स्वर में अपनी तथा प्रमुख कवियों की रचनाएं, मुकेश जी के तथा अन्य प्रमुख गायकों के फिल्मी, गैर फिल्मी गीत, ग़ज़लें आदि प्रस्तुत करता हूँ जो मेरा विश्वास है कि संगीत प्रेमियों को अवश्य पसंद आएंगे। आप सभी से अनुरोध है कि मेरे चैनल को सब्स्क्राइब करके…
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मेरी हालत देखिए !
मेरी हालत देखिए और उन की सूरत देखिए,फिर निगाह-ए-ग़ौर से क़ानून-ए-क़ुदरत देखिए| जोश मलीहाबादी
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गीतों में भर देंगे हम!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- जो प्रसाद देगा जीवन वहगीतों में भर देंगे हम! करना सदुपयोग हमकोउपहारों का, अवशिष्टों का,मान और अपमान मिला जोया व्यवहार विशिष्टों का, लिखते नहीं बही पर सब कुछजस का तस धर देंगे हम। वैसे जीवन का उधार भीहम पर है काफी ज्यादासबसे ही कुछ…