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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Nov 2025

    पैरहन घटाओं के!

    तुम ने सिर्फ़ चाहा है हम ने छू के देखे हैं,पैरहन घटाओं के जिस्म बर्क़-पारों के| साहिर लुधियानवी

  • 5th Nov 2025

    गेसुओं की छाँव में!

    गेसुओं की छाँव में दिल-नवाज़ चेहरे हैं,या हसीं धुँदलकों में फूल हैं बहारों के| साहिर लुधियानवी

  • 5th Nov 2025

    इस तरफ़ से गुज़रे थे!

    इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के,आज तक सुलगते हैं ज़ख़्म रहगुज़ारों के| साहिर लुधियानवी

  • 5th Nov 2025

    वो काला एक बांसुरी वाला!

    आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने स्वर मैं अनूप जलोटा जी का गाया हुआ यह प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ- वो काला एक बांसुरी वाला सुध बिसरा गया मोरी रे आशा है आपको पसंद आएगा धन्यवाद।

  • 5th Nov 2025

    फ़ितरत-ए-इंसाँ को!

    जुरअत-ए-इंसाँ पे गो तादीब के पहरे रहे,फ़ितरत-ए-इंसाँ को कब ज़ंजीर पहनाई गई| साहिर लुधियानवी

  • 5th Nov 2025

    अब तो ये बातें भी!

    उनका ग़म उनका तसव्वुर उनके शिकवे अब कहाँ,अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गईं आई गई| साहिर लुधियानवी

  • 5th Nov 2025

    दिल की धड़कन में!

    दिल की धड़कन में तवाज़ुन* आ चला है ख़ैर हो,मेरी नज़रें बुझ गईं या तेरी रानाई गई|*विराम साहिर लुधियानवी

  • 5th Nov 2025

    सूरज की पेशी!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कन्हैया लाल नंदन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। नंदन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैया लाल नंदन जी का यह नवगीत – आँखों में रंगीन नज़ारेसपने बड़े-बड़ेभरी धार लगता है जैसेबालू बीच खड़े । बहके…

  • 4th Nov 2025

    कैसे कैसे पैकरों की!

    कैसे कैसे चश्म ओ आरिज़ गर्द-ए-ग़म से बुझ गए,कैसे कैसे पैकरों की शान-ए-ज़ेबाई गई| साहिर लुधियानवी

  • 4th Nov 2025

    हम करें तर्क-ए-वफ़ा!

    हम करें तर्क-ए-वफ़ा अच्छा चलो यूँ ही सही,और अगर तर्क-ए-वफ़ा से भी न रुस्वाई गई| साहिर लुधियानवी

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