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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Feb 2026

    ठुमक ठुमक मत चलो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया यह मधुर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- ठुमक ठुमक मत चलो किसी का दिल तड़पेगा! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********

  • 21st Feb 2026

    और सिर्फ़ शाएर तू!

    ‘फ़राज़’ तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया,ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू| अहमद फ़राज़

  • 21st Feb 2026

    दीप भोर तक जले!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत– गगन की गोद में धरा, धरा पे तम पले,घोर तम की…

  • 20th Feb 2026

    किसी की ख़ातिर तू!

    फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़

  • 20th Feb 2026

    क्या सोचता है आख़िर तू!

    हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़

  • 20th Feb 2026

    ऐसे ऐसे लोग रह गए-1

    अपने यूट्यूब चैनल शॉर्ट के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की एक व्यंग्य कविता का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऐसे ऐसे लोग रह गए आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 20th Feb 2026

    दुनिया तुझे बदल देगी!

    मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी,मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़

  • 20th Feb 2026

    मिरी मिसाल कि!

    मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ,तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू| अहमद फ़राज़

  • 20th Feb 2026

    हंगामा है क्यों बरपा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैंअपने स्वर में अकबर इलाहाबादी जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे ग़ुलाम अली जी ने बड़े खूबसूरत अंदाज़ में गाया था – हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******

  • 20th Feb 2026

    पेड़

    आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा पेड़ हमारी आस्थाओं का प्रतिफलन है,पेड़ बनने के लिए ज़रूरी हैकि पहले हम ऐसा बीज हों-जिसे धरती स्वीकार करे,फिर धरती में रचे-बसेरसों-स्वादों, मूल रसायनों से भीहमारा तालमेल हो,तभी हम धरती का सीना चीरकरअपना नाज़ुक सिर, शान से उठा सकेंगे। फिर यहाँ…

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