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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Nov 2025

    जिसने धोके में न आने

    डर यही है कि कहीं ख़ुद से न धोका खा जाए,जिस ने धोके में न आने की क़सम खाई है। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 2nd Nov 2025

    इन्क़िलाबात के शोले!

    इन्क़िलाबात के शोले भी कहीं बुझते हैं,आप ने आग बुझाने की क़सम खाई है। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 2nd Nov 2025

    आशियानों को जलाने!

    बाग़बानों ने ये एहसास हुआ है मुझ को,आशियानों को जलाने की क़सम खाई है। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 2nd Nov 2025

    वो तेरे प्यार का ग़म!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ अपने स्वर में मुकेश जी का गाया हुआ एक अत्यंत मधुर गीत- वो तेरे प्यार का ग़म, एक बहाना था सनम, अपनी किस्मत ही कुछ ऐसी थी, कि दिल टूट गया। आशा है आपको पसंद आएगा धन्यवाद।

  • 2nd Nov 2025

    मैंने आँसू न बहाने की!

    तुम ने जी भर के सताने की क़सम खाई है,मैं ने आँसू न बहाने की क़सम खाई है। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 2nd Nov 2025

    मैं राह-नुमाओं में!

    मैं राह-नुमाओं में नहीं मान मिरी बात,मैं भी हूँ इसी दश्त का सौदाई इधर आ। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 2nd Nov 2025

    इन अंधेरी घाटियों के!

    आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- इन अंधेरी घाटियों के पार जाना हैवक़्त तो इसमें लगेगा । आज की दुनिया बहुत खूंख्वार लगती है, आदमीयत पर खिंचीतलवार लगती है, इस व्यवस्था का कोई उपचार लाना हैप्रेम क्या संभव करेगा। मानते जो स्वयं को सिरमौर दुनिया का,पालने में पालतेआतंक के…

  • 1st Nov 2025

    मुझ को भी ये दुनिया!

    सुनता हूँ कि तुझ को भी ज़माने से गिला है,मुझ को भी ये दुनिया नहीं रास आई इधर आ। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 1st Nov 2025

    मिल बाँट के रो लें!

    मुझ को भी ये लम्हों का सफ़र चाट रहा है, मिल बाँट के रो लें ऐ मिरे भाई इधर आ। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 1st Nov 2025

    यूँ तोड़ न मुद्दत की!

    यूँ तोड़ न मुद्दत की शनासाई इधर आ,आ जा मिरी रूठी हुई तन्हाई इधर आ। मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

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