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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Nov 2025

    यारों के इल्तिफ़ात!

    लगता है उस की बातों से ये ‘शहरयार’ भी’यारों के इल्तिफ़ात का मारा हुआ सा है| शहरयार

  • 1st Nov 2025

    कारोबार-ए-इश्क़!

    पहले थे जो भी आज मगर कारोबार-ए-इश्क़,दुनिया के कारोबार से मिलता हुआ सा है| शहरयार

  • 1st Nov 2025

    तुमसे नाराज़ तो नहीं हूँ मैं!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक श्रेष्ठ नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ – फैली है दूर तक परेशानी, तिनके सा तिरता हूँ तो क्या हैतुमसे नाराज़ तो नहीं हूँ मैं आशा है आपको पसंद आएगाधन्यवाद।

  • 1st Nov 2025

    नज़राना तेरे हुस्न को!

    नज़राना तेरे हुस्न को क्या दें कि अपने पास,ले दे के एक दिल है सो टूटा हुआ सा है| शहरयार

  • 1st Nov 2025

    क्या हादिसा हुआ है !

    क्या हादिसा हुआ है जहाँ में कि आज फिर,चेहरा हर एक शख़्स का उतरा हुआ सा है| शहरयार

  • 1st Nov 2025

    तुमसे अलग होकर!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और समाचार पत्रिका दिनमान के संपादन से संबंधित रहे स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – तुमसे अलग होकर लगता…

  • 31st Oct 2025

    चल चल के थक गया!

    चल चल के थक गया है कि मंज़िल नहीं कोई, क्यूँ वक़्त एक मोड़ पे ठहरा हुआ सा है| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    हर फूल अपनी शाख़!

    गुलशन में इस तरह से कब आई थी फ़स्ल-ए-गुल,हर फूल अपनी शाख़ से टूटा हुआ सा है| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    भूला हुआ सा है|

    किस फ़िक्र किस ख़याल में खोया हुआ सा है,दिल आज तेरी याद को भूला हुआ सा है| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    हमारी बे-हिसी पे!

    हमारी बे-हिसी पे रोने वाला भी नहीं कोई,चलो जल्दी चलो फिर शहर को जलता हुआ देखें| शहरयार

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