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बचाते हम अपनी जान!
निगल गए सब की सब समुंदर ज़मीं बची अब कहीं नहीं है,बचाते हम अपनी जान जिस में वो कश्ती भी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर
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बुझी हुई शमअ का धुआं हूँ !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मैंने बहुत पहले कहीन सुने थे- बुझी हुई शमअ का धुआं हूँ और अपने मरकज़ पे जा रहा हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****
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ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं संगम फिल्म के लिए रफी साहब का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर कि तुम नाराज़ ना होना! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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सरिता!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत– यह लघु सरिता का बहता जलकितना शीतल¸ कितना निर्मल¸ हिमगिरि के हिम से निकल–निकल¸यह…