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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Sep 2026

    शोर यूँ ही न परिंदों ने!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत हैं मेरे स्वर में कैफ़ीआज़मी जी के दो खूबसूरत शेर- शोर यूँ ही न परिंदों ने मचाया होगा! आशा है आपको यह पसंद आएंगे, धन्यवाद। ******

  • 21st Sep 2026

    ऐश-ए-दुनिया की!

    ऐश-ए-दुनिया की जुस्तुजू मत कर,ये दफ़ीना* मिला नहीं करता|*छुपा हुआ रत्न मुनीर नियाज़ी

  • 21st Sep 2026

    रंग कोई वफ़ा नहीं करता!

    रंग-ए-महफ़िल बदलता रहता है,रंग कोई वफ़ा नहीं करता| मुनीर नियाज़ी

  • 21st Sep 2026

    मिडनाइट गप-शप और गीत -21 नवंबर

    मिडनाइट गप-शप और गीत -21 नवंबरअपने यूट्यूब चैनल पर मैंने मध्य रात्रि के बाद लोगों से अनौपचारिक चर्चा की और कुछ गीत भी प्रस्तुत किए, संबंधित वीडिओ अवलोकन हेतु प्रस्तुत है- आशा है आपको यह रुचिकर लगेगा,धन्यवाद । ******

  • 21st Sep 2026

    कविताएं -गीत, 20/9

    मेरे यूट्यूब चैनल लाइव के माध्यम से मेरे स्वर में कुछ प्रमुख हास्य कवियों की कविताएं और मुकेश जी के दो गीत प्रस्तुत हैं- हास्य कविताएं और गीत- 20 सितंबर आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 21st Sep 2026

    रिहा नहीं करता!

    आइना अब जुदा नहीं करता,क़ैद में हूँ रिहा नहीं करता| मुनीर नियाज़ी

  • 21st Sep 2026

    आ जा रे परदेसी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- आ जा रे परदेसी, मैं तो कबसे खड़ी इस पार!फिल्म- मधुमती मुख्य कलाकार- दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला गीतकार- शैलेन्द्र संगीतकार- सलिल चौधरी गायिका- लता मंगेशकर प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 21st Sep 2026

    अधूरी समाप्तियां!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि बालस्वरूप राही जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। राही जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत- सब समाप्त हो जाने के पश्चात भीकुछ ऐसा हैजो कि अनहुआ रह जाता है चलते-चलते राह कहीं चुक…

  • 20th Sep 2026

    उकताए हुए रहना!

    आदत ही बना ली है तुम ने तो ‘मुनीर’ अपनी,जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना| मुनीर नियाज़ी

  • 20th Sep 2026

    कल रात तन्हा चांद को!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह शेर – कल रात तन्हा चांद को देखा था मैंने ख्वाब में!फिल्म- माटी मांगे खून शायर- मोहसिन नक़वी गायक- ग़ुलाम अली प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

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