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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th May 2026

    समुंदर नहीं देखे जाते!

    भीगती आँखों के मंज़र नहीं देखे जाते,हम से अब इतने समुंदर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 4th May 2026

    मन है सफर में!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के गीत ‘भीड़ में न भी रहता हूँ वीरान के सहारे‘ का अगला भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- तन चाहे कहीं भी हो मन है सफर में! आशा है यह आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 4th May 2026

    ये खेल मुकम्मल हो जाए!

    ज़ुल्म और सब्र का ये खेल मुकम्मल हो जाए,उस को ख़ंजर जो दिया है मुझे सर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 4th May 2026

    दुल्हन से तुम्हारा मिलन होगा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- ‘अनोखी रात’ का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे इंदीवर जी ने लिखा था और रोशन जी ने इसका संगीत तैयार किया था- दुल्हन से तुम्हारा मिलन होगा रे मन थोड़ी धीर धरो! आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 4th May 2026

    समझौता कहाँ हुआ!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। रंग जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत – समझौता कहाँ हुआ?प्यास और पानी का,भक्त और ज्ञानी का;सतही सम्वेदन नेमर्मस्थल कहाँ छुआ?समझौता कहाँ…

  • 3rd May 2026

    उन्हें घर भी देना!

    मैं तो इस ख़ाना-बदोशी में भी ख़ुश हूँ लेकिन,अगली नस्लें तो न भटकें उन्हें घर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 3rd May 2026

    बातों में असर भी देना!

    गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था,अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 3rd May 2026

    जीने का हुनर भी देना!

    ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना,पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 3rd May 2026

    कहीं जो शहर में निकलूँ!

    मिरे जुनून को सहरा ही झेल सकता है,कहीं जो शहर में निकलूँ तो क़त्ल-ए-आम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 3rd May 2026

    चारों ओर बिखरे हैं धूल भरे रास्ते!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के गीत ‘भीड़ में भी रहता हूँ वीरान के सहारे’ का अगला अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ- चारों ओर बिखरे हैं धूल भरे रास्ते! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

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