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हमारा दिल दुखाना चाहिए था!
वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था,आना न आना मेरी है मर्ज़ी, मगर तुमको बुलाना चाहिए था| राहत इन्दौरी
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अब निशा देती निमंत्रण!
आज मैं हिन्दी के अत्यंत प्रसिद्ध गीत कवि और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पूज्य पिताश्री स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी, हां जी किसी जमाने में ‘बच्चन जी’ का मतलब स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी ही होता था| बच्चन जी के गीत श्रोताओं और पाठकों…
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ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है!
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।ओस और धूप के सदमे न सहेगा कोईअब मेरे देश में बेघर न रहेगा कोई|नए वादों का जो डाला है वो जाल अच्छा हैरहनुमाओं ने कहा है कि ये साल अच्छा हैदिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है! साबिर दत्त
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न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा!
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।है यक़ीं अब न कोई शोर-शराबा होगाज़ुल्म होगा न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा| साबिर दत्त
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प्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं!
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।आंधी नफ़रत की चलेगी न कहीं अब के बरसप्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं अब के बरस| साबिर दत्त
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भूख के मारे कोई —
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।भूख के मारे कोई बच्चा नहीं रोएगाचैन की नींद हर एक शख़्स यहाँ सोएगा| साबिर दत्त
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नववर्ष – 2022
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।ज़ुल्म की रात बहुत जल्द टलेगी अब तोआग चूल्हों में हर इक रोज़ जलेगी अब तो| साबिर दत्त
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सर न कांधे से सहेली के उठाया होगा!
आज जिस गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, वह युद्ध की पृष्ठभूमि में बनी प्रसिद्ध फिल्म- ‘हक़ीक़त’ से है और इसको चार श्रेष्ठ पुरुष गायकों- मोहम्मद रफ़ी साहब, मन्ना डे साहब, भूपेन्द्र जी और तलत महमूद जी ने बड़े खूबसूरत अन्दाज़ में गाया है| कैफ़ी आज़मी साहब का लिखा यह गीत, अपने बोलों, श्रेष्ठ…