ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है!

इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।
ओस और धूप के सदमे न सहेगा कोई
अब मेरे देश में बेघर न रहेगा कोई|
नए वादों का जो डाला है वो जाल अच्छा है
रहनुमाओं ने कहा है कि ये साल अच्छा है
दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है!

साबिर दत्त

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