न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा!

इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।
है यक़ीं अब न कोई शोर-शराबा होगा
ज़ुल्म होगा न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा|

साबिर दत्त

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