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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Jan 2022

    कि मैं ज़िन्दा हूँ अभी!

    ज़हर पीने की तो आदत थी ज़माने वालोंअब कोई और दवा दो कि मैं ज़िन्दा हूँ अभी| सुदर्शन फाक़िर

  • 4th Jan 2022

    क़ातिल की निगाहों की तरह!

    ग़म बढे़ आते हैं क़ातिल की निगाहों की तरह,तुम छिपा लो मुझे, ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह| सुदर्शन फाक़िर

  • 4th Jan 2022

    भाषा वंदना

    आदरणीय सोम ठाकुर जी का बहुत प्रसिद्ध गीत है जो हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी की वंदना का गीत है| हिन्दी की समृद्ध परंपरा और शक्ति का जो वर्णन इस गीत में बहुत सहज भाव से कर दिया गया है, उसका वर्णन करने में विद्वानों को काफी लंबा विवरण देना पड़ता है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री…

  • 3rd Jan 2022

    न अच्छा हुआ बुरा न हुआ!

    दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ, मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 3rd Jan 2022

    दिल पत्थर कर दे या अल्लाह!

    या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे,या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह| क़तील शिफ़ाई

  • 3rd Jan 2022

    कोई सहर दे या अल्लाह!

    सूरज सी इक चीज़ तो हम सब देख चुके,सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह| क़तील शिफ़ाई

  • 3rd Jan 2022

    चांद सितारे कब मांगे!

    मैंने तुझसे चांद सितारे कब मांगे,रौशन दिल बेदार नज़र दे या अल्लाह| क़तील शिफ़ाई

  • 3rd Jan 2022

    फिर चाहे दीवाना कर दे!

    दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह,फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह| क़तील शिफ़ाई

  • 3rd Jan 2022

    दिल का खिलौना हाय टूट गया!

    पंडित भारत व्यास जी के लिखे एक खूबसूरत गीत के बोल आज शेयर कर रहा हूँ| इस गीत को 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ के लिए वसंत देसाई जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने बहुत सुंदर ढंग से गाया था| इतना लंबा समय बीत जाने के बाद, आज भी…

  • 2nd Jan 2022

    सर को बचाना चाहिए था!

    अब ये ताज किस काम का है, हमें सर को बचाना चाहिए था! राहत इन्दौरी

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