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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Jan 2022

    मुस्कुराना चाहिए था!

    मेरी बर्बादी पे वो यह चाहता है, मुझे भी मुस्कुराना चाहिए था| राहत इन्दौरी

  • 2nd Jan 2022

    एक ठिकाना चाहिए था!

    तेरा भी शहर में कोई नहीं था, मुझे भी एक ठिकाना चाहिए था! राहत इन्दौरी

  • 2nd Jan 2022

    ज़ख्म पुराना बहुत है!

    हमारा ज़ख्म पुराना बहुत है, चारागर भी पुराना चाहिए था| राहत इन्दौरी

  • 2nd Jan 2022

    बहाना चाहिए था!

    मेरी आँखें कहाँ जी नम हुई थीं, समुन्दर को बहाना चाहिए था| राहत इन्दौरी

  • 2nd Jan 2022

    सारा ज़माना चाहिए था!

    हमारी ख्वाहिश एक घर की थी, उसे सारा ज़माना चाहिए था| राहत इन्दौरी

  • 2nd Jan 2022

    हमारा दिल दुखाना चाहिए था!

    वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था,आना न आना मेरी है मर्ज़ी, मगर तुमको बुलाना चाहिए था| राहत इन्दौरी

  • 2nd Jan 2022

    अब निशा देती निमंत्रण!

    आज मैं हिन्दी के अत्यंत प्रसिद्ध गीत कवि और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पूज्य पिताश्री स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी, हां जी किसी जमाने में ‘बच्चन जी’ का मतलब स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी ही होता था| बच्चन जी के गीत श्रोताओं और पाठकों…

  • 1st Jan 2022

    ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है!

    इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।ओस और धूप के सदमे न सहेगा कोईअब मेरे देश में बेघर न रहेगा कोई|नए वादों का जो डाला है वो जाल अच्छा हैरहनुमाओं ने कहा है कि ये साल अच्छा हैदिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है! साबिर दत्त

  • 1st Jan 2022

    न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा!

    इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।है यक़ीं अब न कोई शोर-शराबा होगाज़ुल्म होगा न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा| साबिर दत्त

  • 1st Jan 2022

    प्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं!

    इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।आंधी नफ़रत की चलेगी न कहीं अब के बरसप्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं अब के बरस| साबिर दत्त

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