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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Feb 2022

    रेत भरी है आंखों में!

    रेत भरी है आंखों में,सपने ताजमहल के हैं। बालस्वरूप राही

  • 7th Feb 2022

    मिसरे उसी ग़ज़ल के हैं!

    जो आधे में छूटी हम,मिसरे उसी ग़ज़ल के हैं। बिछे पाँव में क़िस्मत है,टुकड़े तो मखमल के हैं। बालस्वरूप राही

  • 7th Feb 2022

    ठेकेदार धुंधलके हैं!

    नई सुबह के क्या कहने,ठेकेदार धुंधलके हैं। बालस्वरूप राही

  • 7th Feb 2022

    सौदे गंगा जल के हैं!

    मदिरालय की मेज़ों पर,सौदे गंगा जल के हैं। बालस्वरूप राही

  • 7th Feb 2022

    सागर छलके हैं!

    कहने को दो पलकें हैं,कितने सागर छलके हैं। बालस्वरूप राही

  • 7th Feb 2022

    मेहमां दो पल के हैं!

    उनके वादे कल के हैं,हम मेहमां दो पल के हैं। बालस्वरूप राही

  • 7th Feb 2022

    मेरी आवाज़ ही, पहचान है!

    लीजिए लता जी को विदा करने का समय भी आ गया| एक ज़माना रहा फिल्म संगीत का, जिसमें रफी साहब रहे, मुकेश जी, किशोर दा, हेमंत कुमार जी, मन्ना डे साहब आदि अनेक पुरुष गायक थे, महिला गायिकाएं भी अनेक रहीं जिनमें लता जी की छोटी बहन आशा भौंसले जी, सुमन कल्याणपुर जी, गीता दत्त…

  • 6th Feb 2022

    मिलता है कोई काफ़िर!

    ‘फ़िराक़’ अक्सर बदल कर भेस मिलता है कोई काफ़िर, कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 6th Feb 2022

    ऐ दोस्त हर एहसान लेते हैं!

    तुझे घाटा न होने देंगे कारोबार-ए-उल्फ़त में, हम अपने सर तेरा ऐ दोस्त हर एहसान लेते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 6th Feb 2022

    जिस तरह मा’नी जान लेते हैं!

    जिसे सूरत बताते हैं पता देती है सीरत का, इबारत देखकर जिस तरह मा’नी जान लेते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

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