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जज़्बों की दहकाए हुए रहना!
बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना, इक आग सी जज़्बों की दहकाए हुए रहना| मुनीर नियाज़ी
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वेला हुई संवत्सरा!
एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक अत्यंत लोकप्रिय और सृजनशील रचनाकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| प्रेम के कवि सोम जी ने राष्ट्र, राष्ट्रभाषा और मानवता की भावभूमि पर अनेक प्रसिद्ध रचनाएं लिखी हैं| श्री सोम ठाकुर जी ने अनेक बार मेरे संस्थान के लिए आयोजित कवि…