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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Aug 2022

    आँख तक आ भी नहीं सकता!

    क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता, आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 25th Aug 2022

    शाम के वक़्त कभी!

    आज फिर से मैं हिन्दी के एक अत्यंत चर्चित और सृजनशील रचनाकार श्री सूर्यभानु गुप्त जी एक रचना शेयर कर रहूँ| श्री सूर्यभानु गुप्त जी के बहुत से शेर मैं अक्सर उद्धृत करता हूँ जैसे- ‘दिलवाले फिरते हैं दर-दर सिर पर अपनी खाट लिए’, ‘जब अपनी प्यास के सहरा से डर गया हूँ मैं’ आदि|…

  • 24th Aug 2022

    नींद उड़ा देनी चाहिए!

    मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे, मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    मुझको दुआ देनी चाहिए!

    मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो, मैं सब्र हूँ तो मुझको दुआ देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    ख़ाक उड़ा देनी चाहिए!

    मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग, मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    आग बुझा देनी चाहिए!

    मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब, मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    नक़ाब उठा देनी चाहिए!

    मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना, तुझको भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    ला के छुपा देनी चाहिए!

    दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं, दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    पूँजी लगा देनी चाहिए!

    अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में, है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    पिला देनी चाहिए!

    बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए, मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए| राहत इंदौरी

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