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जाते जाते वो मुझे !
जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी
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जंग लाज़िम हो तो!
ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा,जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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अब ये बिकते हुए!
वज़’-दारी तो बुज़ुर्गों की अमानत है मगर,अब ये बिकते हुए ज़ेवर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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कहाँ तो तय था चरागां
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि दुष्यंत कुमार जी द्वारा आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों में से एक प्रस्तुत कर रहा हूँ, ये ग़ज़लें ‘साए में धूप’ नामक संग्रह में प्रकाशित की गई थीं- कहाँ तो तय था चरागां हर एक घर के लिए! आशा है आपको यह पसंद आएगी,…
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उस से मिलना है तो!
उस से मिलना है तो फिर सादा-मिज़ाजी से मिलो,आईने भेस बदल कर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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भीगती आँखों के मंज़र!
भीगती आँखों के मंज़र नहीं देखे जाते,हम से अब इतने समुंदर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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दुनिया बनाने वाले !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं तीसरी क़सम फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,काहे को दुनिया बनाई। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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जड़ता के बावज़ूद।
आज फिर से मेरी एक पुरानी कविता प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- जड़ता के बावज़ूद। चौराहे पर झगड़ रहे थेकुछ बदनाम चेहरे,आंखों में पुते वैमनस्य के बावज़ूदभयानक नहीं थे वे।भीड़ जुड़ीऔर करने लगी प्रतीक्षा-किसी मनोरंजक घटना की।कुछ नहीं हुआ,मुंह लटकाए भीड़धाराओं में बंटी और लुप्त हो गई।**अगले चौराहे पर,अब भी जुटी है भीड़जारी…
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ज़ुल्म और सब्र का!
ज़ुल्म और सब्र का ये खेल मुकम्मल हो जाए, उस को ख़ंजर जो दिया है मुझे सर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी