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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Aug 2022

    सीने पे सो जाओ किसी दिन!

    मैं अपनी हर इक साँस उसी रात को दे दूँ, सर रख के मिरे सीने पे सो जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Aug 2022

    रात को चमकाओ किसी दिन!

    गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे, इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Aug 2022

    मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन!

    ख़ुशबू की तरह गुज़रो मिरी दिल की गली से, फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Aug 2022

    झूम के घर आओ किसी दिन!

    पेड़ों की तरह हुस्न की बारिश में नहा लूँ, बादल की तरह झूम के घर आओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Aug 2022

    खुल जाओ किसी दिन!

    राज़ों की तरह उतरो मिरे दिल में किसी शब, दस्तक पे मिरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Aug 2022

    बरस जाओ किसी दिन!

    चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन, क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Aug 2022

    कुछ चीज़ें होती हैं जो!

    आज फिर से अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, अज्ञेय जी प्रयोगवाद और उसके बाद नई कविता के द्वार खोलने वाले प्रमुख कवि थे, साहित्य की सभी विधाओं में उनका प्रमुख योगदान था, उनका उपन्यास ‘शेखर एक जीवनी’ अदभुद था|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन जी की यह कविता, जिनको…

  • 12th Aug 2022

    चढ़ गया ज़हर गुल मसलते ही!

    ख़ून सा लग गया है हाथों में, चढ़ गया ज़हर गुल मसलते ही| मुनीर नियाज़ी

  • 12th Aug 2022

    अक्स-ए-दीवार के बदलते ही!

    तू भी जैसे बदल सा जाता है, अक्स-ए-दीवार के बदलते ही| मुनीर नियाज़ी

  • 12th Aug 2022

    मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही!

    कौन था तू कि फिर न देखा तुझे, मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही| मुनीर नियाज़ी

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