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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Feb 2023

    याद के साये हैं पनाहों की तरह!

    हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त,बस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    मुख़ालिफ़ के गवाहों की तरह!

    अपनी नज़रों में गुनाहगार न होते, क्यों कर,दिल ही दुश्मन हैं मुख़ालिफ़ के गवाहों की तरह| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    ऋतुओं की संधि!

    आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गीतकार और कुशल मंच संचालक श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत, जिसमें ऋतुओं के संधि काल का विशेष वर्णन किया गया…

  • 5th Feb 2023

    ज़माने में यही होता रहा है!

    मोहब्बत में ‘फ़िराक़’ इतना न ग़म कर, ज़माने में यही होता रहा है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 5th Feb 2023

    जुदा आग़ाज़ से अंजाम से दूर!

    जुदा आग़ाज़ से अंजाम से दूर, मोहब्बत इक मुसलसल माजरा है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 5th Feb 2023

    इस रंग से शरमा रहा है!

    गुलाबी होती जाती हैं फ़ज़ाएँ, कोई इस रंग से शरमा रहा है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 5th Feb 2023

    तेरा दर्द अब तक जागता है!

    जिसे चौंका के तूने फेर ली आँख, वो तेरा दर्द अब तक जागता है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 5th Feb 2023

    प्यार तुझ पर आ गया है!

    शिकायत तेरी दिल से करते करते, अचानक प्यार तुझ पर आ गया है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 5th Feb 2023

    मोहब्बत को बड़ा धोका रहा है!

    न जी ख़ुश कर सका तेरा करम भी, मोहब्बत को बड़ा धोका रहा है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 5th Feb 2023

    निगाहों को बड़ा धोका हुआ है!

    हिजाबों को समझ बैठा मैं जल्वा, निगाहों को बड़ा धोका हुआ है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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