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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Feb 2023

    क्या गाऊँ!

    आज फिर हिन्दी कविता के विराट पुरुष- महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| निराला जी ने इस कविता में भी माता सरस्वती के समक्ष अपना विनम्र निवेदन किया है| निराला जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी…

  • 6th Feb 2023

    रात सपना बहार का देखा!

    रात सपना बहार का देखा दिन हुआ तो ग़ुबार सा देखा,बेवफ़ा वक़्त बेज़ुबाँ निकला बेज़ुबानी को नाम क्या दें हम| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    इस जवानी को नाम क्या दें हम!

    आपको यूँ ही ज़िन्दगी समझा धूप को हमने चाँदनी समझा,भूल ही भूल जिसकी आदत है इस जवानी को नाम क्या दें हम| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    मेहरबानी को नाम क्या दें हम!

    आप इल्ज़ाम धर गये हम पर एक एहसान कर गये हम पर,आपकी ये मेहरबानी है मेहरबानी को नाम क्या दें हम| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    कहानी को नाम क्या दें हम!

    ज़ख़्म जो आप की इनायत है इस निशानी को नाम क्या दें हम,प्यार दीवार बन के रह गया है इस कहानी को नाम क्या दें हम| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम!

    लबों से लब जो मिल गए, लबों से लब जो सिल गए,सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    लिखा था जिस किताब में!

    लिखा था जिस किताब में, कि इश्क़ तो हराम है,हुई वही किताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गई!

    मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गई,गिलास ग़ुम शराब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    चराग़-ओ-आफ़्ताब ग़ुम!

    चराग़-ओ-आफ़्ताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी,शबाब की नक़ाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 6th Feb 2023

    इंसाफ़ के शाहों की तरह!

    जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाये, “फ़ाकिर”,वो भी पेश आये हैं इंसाफ़ के शाहों की तरह| सुदर्शन फ़ाकिर

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