Category: Uncategorized
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रवींद्र से!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान करने वाले तथा धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की…
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घर के रौशनदानों पर!
आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर, उस का काग़ज़ चिपका देना घर के रौशन-दानों पर| जाँ निसार अख़्तर
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रुस्वा हो सा जाता हूँ!
तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है, कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर
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प्यासा हो सा जाता हूँ!
तिरे गुल-रंग होंटों से दहकती ज़िंदगी पी कर, मैं प्यासा और प्यासा और प्यासा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर
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झूटा हो सा जाता हूँ!
मैं चाहे सच ही बोलूँ हर तरह से अपने बारे में, मगर तुम मुस्कुराती हो तो झूटा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर
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तन्हा हो सा जाता हूँ!
मैं तुम से दूर रहता हूँ तो मेरे साथ रहती हो, तुम्हारे पास आता हूँ तो तन्हा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर
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अपना हो सा जाता हूँ!
मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ , मगर वो लम्हा जब मैं सिर्फ़ अपना हो सा जाता हूँ | जाँ निसार अख़्तर
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साँस लिए जाते होंगे!
मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे, या‘नी मेरे बा’द भी या’नी साँस लिए जाते होंगे| जौन एलिया
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परिचय/हुंकार!
आज मैं राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह रचना – सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैंस्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैंबँधा हूँ, स्वपन हूँ,…
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क़यामत बाँहों का!
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का, वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे| जौन एलिया