Category: Uncategorized
-
पहचानने में देर लगे!
उसे भी देखूँ तो पहचानने में देर लगे, कभी कभी तो मैं इतनी शराब पीता हूँ| हसरत जयपुरी
-
कितनी शराब पीता हूँ!
मुझे नशे में बहकते कभी नहीं देखा, वो जानता है मैं कितनी शराब पीता हूँ| हसरत जयपुरी
-
महँगी शराब पीता हूँ!
मैं उसकी आँखों से छलकी शराब पीता हूँ, ग़रीब हो के भी महँगी शराब पीता हूँ| हसरत जयपुरी
-
ए’तिबार आ न सके!
तसल्लियों पे बहुत दिन जिया नहीं जाता, कुछ ऐसा हो के तिरा ए’तिबार आ न सके| वसीम बरेलवी
-
चलो, चलें चम्पागढ़!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत विधा के एक प्रमुख कवि स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| ठाकुर प्रसाद सिंह जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का यह नवगीत – चलो, चलें चम्पागढ़–सपनों के देशप्यारे…