Category: Uncategorized
-
दिल ये इरादा कर ले!
ख़ुद-ब-ख़ुद रास्ता दे देगा ये तूफ़ान मुझे, तुझ को पाने का अगर दिल ये इरादा कर ले| मुनव्वर राना
-
वर्ना जो आए समझ में!
अब मुझे पार उतर जाने दे ऐसा कर ले, वर्ना जो आए समझ में तिरी दरिया कर ले| मुनव्वर राना
-
कमरे में अँधेरा कर ले!
काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले, इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले| मुनव्वर राना
-
छत पे उतर जाना है!
एक बे-नाम से रिश्ते की तमन्ना ले कर, इस कबूतर को किसी छत पे उतर जाना है| मुनव्वर राना
-
मातृ वंदना
आज मैं छायावाद युग के एक और प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| निराला जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह रचना – नर जीवन के स्वार्थ सकलबलि हों तेरे चरणों पर,…
-
रोते हुए मर जाना है!
मैं वो मेले में भटकता हुआ इक बच्चा हूँ, जिस के माँ बाप को रोते हुए मर जाना है| मुनव्वर राना
-
लौट के घर जाना है!
घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें, मुझ को मत रोक मुझे लौट के घर जाना है| मुनव्वर राना
-
ज़िंदगी बाँध ले सामान!
मुझ को गहराई में मिट्टी की उतर जाना है, ज़िंदगी बाँध ले सामान-ए-सफ़र जाना है| मुनव्वर राना
-
हम ने ख़ैरात भी!
बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के न लिए, हम ने ख़ैरात भी माँगी है तो ख़ुद्दारी से| राहत इंदौरी