Category: Uncategorized
-
और बिखर जाते होंगे!
उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा, यूँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे| जौन एलिया
-
आते हैं आते होंगे!
वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था, आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे| जौन एलिया
-
मेरे बुझने का नज़्ज़ारा!
शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं, मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे| जौन एलिया
-
जितने भी सितम!
हम-सफ़र लैला भी होगी मैं तभी जाऊँगा, मुझ पे जितने भी सितम करने हों सहरा कर ले| मुनव्वर राना
-
फिर से ऐ दिल!
मुद्दतों बा‘द वो आएगा हमारे घर में, फिर से ऐ दिल किसी उम्मीद को ज़िंदा कर ले| मुनव्वर राना
-
सामने तौबा कर ले!
गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना, आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले| मुनव्वर राना
-
मातृ वंदना
आज मैं छायावाद युग की प्रमुख कवियित्री स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| महादेवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की यह रचना – वे मुस्काते फूल, नहींजिनको आता है मुर्झाना,वे तारों के दीप, नहींजिनको भाता है…
-
कोई मीठा कर ले!
अब बड़े लोगों से अच्छाई की उम्मीद न कर, कैसे मुमकिन है करैला कोई मीठा कर ले| मुनव्वर राना
-
आज तक़ाज़ा कर ले!
आज का काम तुझे आज ही करना होगा, कल जो करना है तो फिर आज तक़ाज़ा कर ले| मुनव्वर राना