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कोई नहीं सुनता!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – कोई नहीं सुनता पुकार–सुनती है कान खड़े करसीढियों पर चौकन्नी खड़ी…
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सितारे नहीं मिल पाए!
जब सितारे ही नहीं मिल पाए, ले के हम शम्स-ओ-क़मर* क्या करते| *चाँद और सूरज परवीन शाकिर
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और कारोबार करूँ!
मैं सोचता हूँ कोई और कारोबार करूँ, किताब कौन ख़रीदेगा इस गिरानी* में| *महंगाई राहत इंदौरी
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ये किसने पाँव उतारे!
ये मौज मौज नई हलचलें सी कैसी हैं, ये किसने पाँव उतारे उदास पानी में| राहत इंदौरी
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उसने यह निर्णय क्यों लिया – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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कोई और रात-रानी में!
चमकता रहता है सूरज-मुखी में कोई और. महक रहा है कोई और रात-रानी में| राहत इंदौरी
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हिसाब कौन रखे!
अब इतनी सारी शबों का हिसाब कौन रखे, बड़े सवाब* कमाए गए जवानी में| *फल (कर्मों के) राहत इंदौरी