Category: Uncategorized
-
किसी शुमार में!
मुझ से ही है हर एक सियासत का ए‘तिबार, फिर भी किसी शुमार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
-
इक मैं ही इस दयार में!
औरों के साथ ऐसा कोई मसअला नहीं, इक मैं ही इस दयार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
-
मैं अपने ही मज़ार में!
फ़िहरिस्त मरने वालों की क़ातिल के पास है, मैं अपने ही मज़ार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
-
मैं तेरे इंतिज़ार में!
तेरी ही जुस्तुजू में लगा है कभी कभी, मैं तेरे इंतिज़ार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
-
हूँ भी नहीं भी हूँ!
मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ, दुनिया के कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
-
निकल आते हैं आँसू!
न जानी क़द्र तेरी उम्र-ए-रफ़्ता हम ने कॉलेज में, निकल आते हैं आँसू अब तुझे जब याद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण
-
बाँसुरी: मोरपाँख!
अज्ञेय जी द्वारा संपादित सप्तकों के कवियों की कविताएं और उसमें से चौथा सप्तक के कवियों की रचनाएं शेयर करने के क्रम में आज मैं श्री नन्दकिशोर आचार्य जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कविताएं शायद मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नन्दकिशोर आचार्य जी की यह…
-
ज़ेवर है जवानी का!
अदब ता‘लीम का जौहर है ज़ेवर है जवानी का, वही शागिर्द हैं जो ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण
-
हमेशा भूलते जाते हैं!
सबक़ उम्र-ए-रवाँ का दिल-नशीं होने नहीं पाता, हमेशा भूलते जाते हैं जो कुछ याद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण
-
सहर का वक़्त है!
नज़र आती है दुनिया इक इबादत-गाह-ए-नूरानी, सहर का वक़्त है बंदे ख़ुदा को याद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण