क्या पता हो भी सके इस की तलाफ़ी* कि नहीं,
शायरी तुझ को गँवाया है बहुत दिन हमने|
*क्षतिपूर्ति
जाँ निसार अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
क्या पता हो भी सके इस की तलाफ़ी* कि नहीं,
शायरी तुझ को गँवाया है बहुत दिन हमने|
*क्षतिपूर्ति
जाँ निसार अख़्तर
Leave a comment