इश्क़ का क़र्ज़ चुकाया!

मुद्दतों तर्क-ए-तमन्ना पे लहू रोया है,

इश्क़ का क़र्ज़ चुकाया है बहुत दिन हमने|

जाँ निसार अख़्तर

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