Category: Uncategorized
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जिएँगे कैसे तुझे भुलाके
तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन, न दिल को मालूम है न हम को जिएँगे कैसे तुझे भुला के| साहिर लुधियानवी
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बस्तियाँ बसा के!
बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के, मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी
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तुम न बुझाना दीप?
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के वरिष्ठ गीतकार श्री बालस्वरूप राही जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| राही जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – तुम न बुझाना दीप द्वार का प्राण, रात भरमेरा जगमग…
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उम्मीद को ज़िंदा!
मुद्दतों बा‘द वो आएगा हमारे घर में, फिर से ऐ दिल किसी उम्मीद को ज़िंदा कर ले| मुनव्वर राना
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तिरे सामने तौबा कर ले
गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना, आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले| मुनव्वर राना
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अब बड़े लोगों से!
अब बड़े लोगों से अच्छाई की उम्मीद न कर, कैसे मुमकिन है करैला कोई मीठा कर ले| मुनव्वर राना
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दिल ये इरादा कर ले!
ख़ुद-ब-ख़ुद रास्ता दे देगा ये तूफ़ान मुझे, तुझ को पाने का अगर दिल ये इरादा कर ले| मुनव्वर राना
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कमरे में अँधेरा कर ले!
काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले, इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले| मुनव्वर राना
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मेरे जिस शे’र पे!
मैं समझ जाता हूँ इस में कोई कमज़ोरी है, मेरे जिस शे‘र पे मिलती है बहुत दाद मुझे| मुनव्वर राना
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कहिए, हम क्या-क्या लिखें?
आज एक बार फिर से मैं, अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का…