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तिनकों पे भरोसा!
जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे, कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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इशारा कौन करे!
ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे, ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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रुस्वा कौन करे!
जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे, अरमान किए दिल ही में फ़ना अरमान को रुस्वा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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चुनाव!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के वरिष्ठ कवि एवं संपादक स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| नंदन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – पहाड़ी के चारों तरफजतन से बिछाई हुई सुरंगों…
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हम लोग खिलौना हैं!
हम लोग खिलौना हैं इक ऐसे खिलाड़ी का, जिस को अभी सदियों तक ये खेल रचाना है| साहिर लुधियानवी
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हर खेल सुहाना है!
इक पल की पलक पर है ठहरी हुई ये दुनिया, इक पल के झपकने तक हर खेल सुहाना है| साहिर लुधियानवी
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समझा है न जाना है!
ये राह कहाँ से है ये राह कहाँ तक है, ये राज़ कोई राही समझा है न जाना है| साहिर लुधियानवी
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इतना ही फ़साना है!
संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है, इक धुँद से आना है इक धुँद में जाना है| साहिर लुधियानवी
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ख़यालों से दूर जा के!
न सोचने पर भी सोचती हूँ कि ज़िंदगानी में क्या रहेगा, तिरी तमन्ना को दफ़्न कर के तिरे ख़यालों से दूर जा के| साहिर लुधियानवी
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चुप रहेंगे नज़र झुकाके
कभी मिलेंगे जो रास्ते में तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे, कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा तो चुप रहेंगे नज़र झुका के| साहिर लुधियानवी