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वो है मगर याद मुझे!
एक क़िस्से की तरह वो तो मुझे भूल गया, इक कहानी की तरह वो है मगर याद मुझे| मुनव्वर राना
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वर्तमान के आँसू!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी नवगीत के अनूठे हस्ताक्षर स्वर्गीय रमेश रंजक जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – पोर-पोर में दर्द निमोहीएक गीत में बाँधूँ कैसे ? अपराधी…
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परिंदे कहाँ से आ पहुँचे
पता नहीं ये परिंदे कहाँ से आ पहुँचे, अभी ज़माना कहाँ था उदास होने का| राहत इंदौरी
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क़सीदा उदास होने का
मिरे लबों से तबस्सुम मज़ाक़ करने लगा, मैं लिख रहा था क़सीदा उदास होने का| राहत इंदौरी
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मज़ा अलग है!
मैं अहमियत भी समझता हूँ क़हक़हों की मगर, मज़ा कुछ अपना अलग है उदास होने का| राहत इंदौरी
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यही जवाज़ बहुत है!
कई दिनों से तबीअ‘त मिरी उदास न थी, यही जवाज़* बहुत है उदास होने का| *औचित्य राहत इंदौरी