बस्तियाँ बसा के!

बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के,

मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के|

               साहिर लुधियानवी

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