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जिस्म पर बाक़ी ये!
जिस्म पर बाक़ी ये सर है क्या करूँ, दस्त-ए-क़ातिल बे-हुनर है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली
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ओ प्रिया!
आज एक बार मैंहिन्दी श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत- ओ प्रियापिन्हाऊँ तुम्हें जुही के झुमके। इस फूली संझा के तट पर,आ बैठें बिल्कुल सट-सटकर,दृष्टि कहे जोउसे सुनें…
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बेवफ़ा की बात करें!
वफ़ा-शिआर कई हैं कोई हसीं भी तो हो, चलो फिर आज उसी बेवफ़ा की बात करें| साहिर लुधियानवी
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किस ख़ुदा की बात!
हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया, करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें| साहिर लुधियानवी
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वो ख़ुदा की बात करें!
सज़ा का हाल सुनाएँ जज़ा की बात करें, ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें| साहिर लुधियानवी
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नफ़रतों के जहान में!
नफ़रतों के जहान में हम को प्यार की बस्तियाँ बसानी हैं, दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी