Category: Uncategorized
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तन्हा कर दिया!
बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया, ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया| नज़ीर बनारसी
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रंग उड़ाया लोगों ने!
‘मीर-तक़ी’ के रंग का ग़ाज़ा* रू-ए-ग़ज़ल पर आ न सका, ‘कैफ़’ हमारे ‘मीर-तक़ी’ का रंग उड़ाया लोगों ने| *गुलाबीपन कैफ़ भोपाली
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क़ुफ़्ल लगाया लोगों ने
नूर-ए-सहर ने निकहत-ए-गुल ने रंग-ए-शफ़क़ ने कह दी बात, कितना कितना मेरी ज़बाँ पर क़ुफ़्ल* लगाया लोगों ने| *Lock कैफ़ भोपाली
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काट गिराया लोगों ने!
तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक़ बे-घर लोग, बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
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ऐब लगाया लोगों ने!
तेरी गली में आ निकले थे दोश हमारा इतना था, पत्थर मारे तोहमत बाँधी ऐब लगाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
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डूबते सितारों के नाम-१
आज एक बार मैंहिन्दी श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह नवगीत गीत की नई और पुरानी पीढ़ियों के अंतरसंबंधों को लेकर कहा जा सकता है| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत- …
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देस छुड़ाया लोगों ने!
हम को दिवाना जान के क्या क्या ज़ुल्म न ढाया लोगों ने, दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
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वो नज़र है क्या करूँ
‘कैफ़’ का दिल ‘कैफ़’ का दिल है मगर, वो नज़र फिर वो नज़र है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली