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अपने बस में आज न हूँ मैं!
हिन्दी काव्य मंचों के एक अद्वितीय गीतकार जिनकी उपस्थिति से मंच को गरिमा और ऊंचाई मिलती थी, ऐसे स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| भारत भूषण जी के अनेक गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं, आज प्रस्तुत है यह गीत| रचना अपना परिचय स्वयं देती है, लीजिए…
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ना समझे वो अनाड़ी हैं!
कल राज कपूर जी की ‘आवारा’ फिल्म का एक गीत शेयर किया था, आज उनकी ही फिल्म ‘अनाड़ी’ का एक गीत याद आ रहा है| कल के गाने में भी राजकपूर थे, उनकी नायिका तो होगी ही, लेकिन आज की फिल्म में नायिका नर्गिस जी नहीं ‘नूतन जी थीं, एक बात और है, इन दोनों…
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दम भर जो उधर मुँह फेरे!
आज मुकेश जी और लता जी का एक रोमांटिक युगल गीत याद आ रहा है| गीतकार शैलेन्द्र जी का लिखा यह गीत, 1951 में रिलीज़ हुई फिल्म-‘आवारा’ में राज कपूर और नर्गिस की सदाबहार जोड़ी पर फिल्माया गया था और इसका मधुर संगीत शंकर-जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने तैयार किया था| हमारे कवि-रचनाकार चांद से…
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आदमी मुसाफ़िर है !
फिल्मी के अत्यंत प्रसिद्ध और सफल गीतकार स्वर्गीय आनंद बख्शी जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में बहुत सरल शब्दों में जीवन दर्शन की कुछ बातें की गई हैं| लीजिए प्रस्तुत है आनंद बख्शी जी का लिखा यह गीत- आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है,आते-जाते रस्ते में यादें…
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भारत माता ग्रामवासिनी!
छायावाद युग के एक स्तंभ, स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| इस कविता को देखकर यह भी आभास होता है कि अब तक कविता कितनी बदल गया है| इस कविता में पंत जी ने उस समय की भारत माता की दयनीय स्थिति का मार्मिक चित्रण किया है| लीजिए प्रस्तुत…
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विषबुझे खंजर न फेंक!
आज एक बार फिर से मैं अपने अग्रज और मेरे लिए गुरुतुल्य रहे श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक,चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न…
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जैसे जैसे घर नियराया!
आज मैं श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक छोटा सा और खूबसूरत नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| किस प्रकार हम अनेक प्रकार से अपने घर से जुड़े होते हैं| पुराने ग्रामीण परिवेश को याद करके इस गीत का और भी अच्छा आस्वादन किया जा सकता है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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मटरू का आना और जाना!
मटरू का पता ही नहीं चलता कि कब वो हमारे, मतलब अपने घर में रहेगा और कब बाहर चला जाएगा| एक तरह से देखा जाए तो उसको आवारा कहा जा सकता है, कभी वो रात में अपने स्थान पर सोता है और सुबह होते ही चला जाता है, और कभी रात भर गायब रहता है…
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Writing and Re-writing of History!
It’s true that image creation for self is what the rulers like the most. For this they have been using the writers and historians also. Till now the job of image creation, writing in favour of those in power was in the hands of some communist authors, historians etc. who did, whatever suited to those…