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रंगीन खिलौने – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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हम हैं अनाड़ी!
आज 1959 में रिलीज हुई फिल्म -अनाड़ी, का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे शैलेन्द्र जी ने लिखा है और शंकर जयकिशन जी ने इसका संगीत दिया है| इस गीत के लिए गीत लेखन, संगीत और गायन तीनों श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ होने के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किए गए थे| राजकपूर साहब पर फिल्माए…
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दूसरा बनवास !
कैफ़ी आज़मी साहब हमारे देश के ऐसे मशहूर शायरों में शामिल थे, जिनका नाम शायरी की दुनिया में बहुत आदर के साथ लिया जाता है| आज उनकी जो नज़्म मैं शेयर कर रहा हूँ उसमें उन्होंने बताया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी यदि बाबरी मस्जिद का गिराया जाना देखते तो उनको कैसा महसूस होता|…
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आँख बच्ची की पनीली है!
आज अदम गोंडवी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| ठेठ देहाती अंदाज़ में आम जनता के जीवन की सच्चाइयों को अदम गोंडवी जी ने बड़े सलीके के साथ बेबाक़ी के साथ अभिव्यक्त किया है| लीजिए आज अदम गोंडवी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली…
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आना-जाना रहे, रहे ना रहे!
आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग,जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। दिल्ली में सरकारी सेवा के दौरान ही मैंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की एक और परीक्षा दी, जो हिंदी अनुवादक के पद पर चयन के लिए थी। इस परीक्षा में मैं सफल हुआ और उसके आधार पर ही आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक पद…
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मोह मोह के धागे!
आज अपने एक मित्र और सहकर्मी के प्रसंग में बात करना चाहूँगा| ये मेरे साथी मेरे बॉस थे, परंतु उनसे बात करते हुए मुझे कभी यह लगा ही नहीं कि वो मेरे बॉस थे| वैसे इस तरह का अनुभव मेरा बहुत से लोगों के साथ रहा है, परंतु उन सबमें शायद ये सबसे सज्जन व्यक्ति…
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दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं।आज फिर से जीवन का एक पुराना पृष्ठ, कुछ पुरानी यादें, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर पहुंच गए लेकिन काफी कुछ पीछे छूट गया। मेरी मां,…
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कौवों ने खुजलाईं पांखें, कई दिनों के बाद!
बंगाल के चुनाव परिणामों को लेकर कुछ कहने का मन हो रहा है| कल देखा कि राजदीप सरदेसाई बहुत दिनों के बाद, अपनी दीदी के बंगाल चुनावों में विजयी होने के उपलक्ष्य में प्रसन्नचित्त होकर उनका इंटरव्यू ले रहे थे| बहुत दिनों के बाद ऐसा मौका आता है जब राजदीप, बरखा दत्त, रवीश कुमार, विनोद…
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यूं ही ना तोड़ अभी बीन रे सपेरे!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| अपनी शुरू की ब्लॉग पोस्ट्स में, मैंने अपनी जीवन यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों का ज़िक्र किया था, आज उनमें से ही एक पोस्ट को दोहरा रहा हूँ, क्योंकि इसमें आदरणीय बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक प्यारा सा…
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गति,अगति, सद्गति!
आज का समय मानव जाति के लिए बड़ा कठिन है, खास तौर पर कोरोना की यह दूसरी लहर भारतवर्ष के लिए बड़े कष्ट लेकर आई है| पहली लहर के समय हम कहते थे कि बाहर से लोगों को क्यों आने दे रहे हैं! आज दूसरे अनेक देश भारत से लोगों का वहाँ जाना प्रतिबंधित कर…