Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 14th Apr 2023

    अब वो जी ही नहीं!

    चाहता था बहुत सी बातों को, मगर अफ़्सोस अब वो जी ही नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Apr 2023

    बहस मैंने की ही नहीं!

    मज़हबी बहस मैंने की ही नहीं, फ़ालतू अक़्ल मुझ में थी ही नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Apr 2023

    मय का काम क्या!

    शैख़ की दावत में मय का काम क्या, एहतियातन कुछ मँगा ली जाएगी| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Apr 2023

    बोतल चढ़ा ली जाएगी!

    क्या ग़म-ए-दुनिया का डर मुझ रिंद को, और इक बोतल चढ़ा ली जाएगी| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Apr 2023

    शमशीर-ए-जफ़ा!

    इस नज़ाकत पर ये शमशीर-ए-जफ़ा, आप से क्यूँकर सँभाली जाएगी| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Apr 2023

    आह जो दिल से!

    आह जो दिल से निकाली जाएगी, क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Apr 2023

    पनघट!

    आज फिर से मैं देश के एक प्रमुख व्यंग्य लेखक स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस कविता गाँव के पनघट का सुंदर चित्र है|  लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता –  ग्राम अलका अप्सराएँपनघट पर नीर भरे! सुन्दर सजीले अंगअचल हिले खुले पंखवस्त्र कसे,…

  • 13th Apr 2023

    हमसे दश्त की आबादी

    हमसे नाम जुनूँ का क़ाइम हमसे दश्त की आबादी, हमसे दर्द का शिकवा करते हमको ज़ख़्म दिखाते हो|   इब्न-ए-इंशा

  • 13th Apr 2023

    भोले भी बन जाते हो!

    बेकल बेकल रहते हो पर महफ़िल के आदाब के साथ, आँख चुराकर देख भी लेते भोले भी बन जाते हो| इब्न-ए-इंशा

  • 13th Apr 2023

    वहशत में उलझाते हो!

    सुनते हैं फिर छुप छुप उनके घर में आते जाते हो, ‘इंशा’ साहब नाहक़ जी को वहशत में उलझाते हो| इब्न-ए-इंशा

←Previous Page
1 … 977 978 979 980 981 … 1,530
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar