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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Nov 2022

    गले लगा लिया वो दूर हो गया!

    अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया, जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया| बशीर बद्र

  • 23rd Nov 2022

    स्तब्ध हैं कोयल!

    आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और नवगीतकार श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| बुदधिनाथ मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– स्तब्ध हैं कोयल कि उनके स्वरजन्मना कलरव नहीं होंगे…

  • 22nd Nov 2022

    हाथ बढ़ा कर देखो!

    फ़ासला नज़रों का धोका भी तो हो सकता है, वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    तुम भी बहल सको तो चलो!

    यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें, इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    ख़ुद को भी पढ़ लिया जाए!

    किताबें यूँ तो बहुत सी हैं मेरे बारे में, कभी अकेले में ख़ुद को भी पढ़ लिया जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    कभी तजरबा किया जाए!

    कहा गया है सितारों को छूना मुश्किल है, ये कितना सच है कभी तजरबा किया जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    कहानी को फिर लिखा जाए!

    जुदा है हीर से राँझा कई ज़मानों से, नए सिरे से कहानी को फिर लिखा जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    आग कहाँ क्यूँ पता किया जाए!

    तुम्हारा घर भी इसी शहर के हिसार में है, लगी है आग कहाँ क्यूँ पता किया जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    हौसला करके ‘नहीं’ कहा जाए!

    हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए, कभी तो हौसला करके ‘नहीं’ कहा जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन!

    मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन, आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन| निदा फ़ाज़ली

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