Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 14th Dec 2022

    कुछ दिन में उतर जाते हैं!

    फिर वही तल्ख़ी-ए-हालात मुक़द्दर ठहरी, नश्शे कैसे भी हों कुछ दिन में उतर जाते हैं| वसीम बरेलवी

  • 14th Dec 2022

    समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं!

    शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं, इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं| वसीम बरेलवी

  • 14th Dec 2022

    चाँदनी चुप-चाप!

    आज अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चाँदनी रात को लेकर अज्ञेय जी की यह अपनी ही प्रकार की अभिव्यक्ति है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जी की यह कविता – चाँदनी चुप-चाप सारी रातसूने आँगन मेंजाल रचती रही।मेरी रूपहीन अभिलाषाअधूरेपन की मद्धिमआँच पर तँचती रही।व्यथा मेरी अनकहीआनन्द की…

  • 13th Dec 2022

    इसका नया इलाज भी हो!

    बदल रहे हैं कई आदमी दरिंदों में, मरज़ पुराना है इसका नया इलाज भी हो| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    जो बदलता है वो समाज भी हो!

    हुकूमतों को बदलना तो कुछ मुहाल नहीं, हुकूमतें जो बदलता है वो समाज भी हो| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    कुछ और काम-काज भी हो!

    न करते शोर-शराबा तो और क्या करते, तुम्हारे शहर में कुछ और काम-काज भी हो| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    कल क्यूँ कभी तो आज भी हो!

    रहेगी वा’दों में कब तक असीर ख़ुश-हाली, हर एक बार ही कल क्यूँ कभी तो आज भी हो| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    घर में दिया भी जले अनाज भी हो!

    हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो, अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज* भी हो|*Protest निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    हर चीज़ नज़र आएगी बेमा’नी सी!

    पहले हर चीज़ नज़र आएगी बे-मा’नी सी, और फिर अपनी ही नज़रों से उतर जाओगे| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    दीवारें जुदा होंगी तो डर जाओगे!

    हर नए शहर में कुछ रातें कड़ी होती हैं, छत से दीवारें जुदा होंगी तो डर जाओगे| निदा फ़ाज़ली

←Previous Page
1 … 919 920 921 922 923 … 1,388
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar