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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jun 2023

    जुम्बिश ख़याल की!

    सर में जुम्बिश ख़याल की भी नहीं, ज़ानुओं पर धरा सा रहता है| गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    घर ज़रा सा रहता है!

    एक पल देख लूँ तो उठता हूँ, जल गया घर ज़रा सा रहता है| गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    काई सी जम गई है!

    काई सी जम गई है आँखों पर, सारा मंज़र हरा सा रहता है| गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    जी भरा सा रहता है!

    सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है| गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    तो बार बार दिखे!

    कोई तिलिस्मी सिफ़त थी जो इस हुजूम में वो, हुए जो आँख से ओझल तो बार बार दिखे| गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    हमको इंतिज़ार दिखे!

    कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़, किसी की आँख में हमको भी इंतिज़ार दिखे| गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    जब भी आबशार दिखे!

    रवाँ हैं फिर भी रुके हैं वहीं पे सदियों से, बड़े उदास लगे जब भी आबशार* दिखे| *झरना गुलज़ार

  • 23rd Jun 2023

    जो न बन पाई तुम्हारे!

    आज मैं हिन्दी काव्य परंपरा के एक अत्यंत श्रेष्ठ कवि, जिन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए थे, ऐसे प्रखर राष्ट्रवादी कवि स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह रचना  –…

  • 22nd Jun 2023

    फूल बे-शुमार दिखे!

    ख़फ़ा थी शाख़ से शायद कि जब हवा गुज़री, ज़मीं पे गिरते हुए फूल बे-शुमार दिखे| गुलज़ार

  • 22nd Jun 2023

    कोई शहसवार दिखे!

    कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे, कहीं से आता हुआ कोई शहसवार दिखे| गुलज़ार

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