-
अकेले क्यों!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक और सुंदर कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी की कुछ कविताएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ और उनके बारे में अपनी जानकारी भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की…
-
ठिकाने के दिन या ठिकाने की रातें!
‘फ़िराक़’ अपनी क़िस्मत में शायद नहीं थे, ठिकाने के दिन या ठिकाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
ग़म भूल जाने की रातें!
हम-आग़ोशियाँ शाहिद-ए-मेहरबाँ की, ज़माने के ग़म भूल जाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
याद है तेरी हर सुब्ह-ए-रुख़्सत!
मुझे याद है तेरी हर सुब्ह-ए-रुख़्सत, मुझे याद हैं तेरे आने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
फुवारें सी नग़्मों की पड़ती हों जैसे!
फुवारें सी नग़्मों की पड़ती हों जैसे, कुछ उस लब के सुनने-सुनाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
गुल-ए-ज़ार के वो खिलाने की रातें!
जवानी की दोशीज़गी का तबस्सुम, गुल-ए-ज़ार के वो खिलाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
इक शख़्स के याद आने की रातें!
वो चुप-चाप आँसू बहाने की रातें, वो इक शख़्स के याद आने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
ख़लीफ़ा की खोपड़ी!
एक बार फिर मैं प्रमुख हास्य व्यंग्य कवि और श्रेष्ठ मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक हास्य-व्यंग्य कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – दर्शकों का नया जत्था आयागाइड ने उत्साह से…