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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Jul 2023

    खोलें क्या स्कूल मियाँ!

    खेलने दें उन्हें इश्क़ की बाज़ी खेलेंगे तो सीखेंगे, ‘क़ैस’ की या ‘फ़रहाद’ की ख़ातिर खोलें क्या स्कूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 2nd Jul 2023

    देते क्यूँ हो तूल मियाँ!

    सुन तो लिया किसी नार की ख़ातिर काटा कोह निकाली नहर, एक ज़रा से क़िस्से को अब देते क्यूँ हो तूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 2nd Jul 2023

    ओस!

    आज एक बार फिर से मैं प्रमुख राष्ट्रवादी हिन्दी कवि स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| द्विवेदी जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की यह कविता –   हरी घास पर बिखेर दी हैंये किसने मोती की लड़ियाँ?कौन…

  • 1st Jul 2023

    दिल को फ़र्श करें!

    नस्ब करें मेहराब-ए-तमन्ना दीदा ओ दिल को फ़र्श करें, सुनते हैं वो कू-ए-वफ़ा में आज करेंगे नुज़ूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 1st Jul 2023

    बाक़ी बात फ़ुज़ूल मियाँ

    ये तो कहो कभी इश्क़ किया है जग में हुए हो रुस्वा भी? इसके सिवा हम कुछ भी न पूछें बाक़ी बात फ़ुज़ूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 1st Jul 2023

    जंगल जंगल फूल मियाँ

    यूँही तो नहीं दश्त में पहुँचे यूँही तो नहीं जोग लिया, बस्ती बस्ती काँटे देखे जंगल जंगल फूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 1st Jul 2023

    होगा तिरा उसूल मियाँ!

    अहल-ए-वफ़ा से बात न करना होगा तिरा उसूल मियाँ, हम क्यूँ छोड़ें उन गलियों के फेरों का मामूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 1st Jul 2023

    देख हमें मत भूल मियाँ

    देख हमारे माथे पर ये दश्त-ए-तलब की धूल मियाँ, हमसे अजब तिरा दर्द का नाता देख हमें मत भूल मियाँ| इब्न-ए-इंशा

  • 1st Jul 2023

    कितने और ठिकाने थे!

    हमको सारी रात जगाया जलते बुझते तारों ने, हम क्यूँ उनके दर पर उतरे कितने और ठिकाने थे| इब्न-ए-इंशा

  • 1st Jul 2023

    इसके लाख बहाने थे!

    ये लड़की तो इन गलियों में रोज़ ही घूमा करती थी, इससे उनको मिलना था तो इसके लाख बहाने थे| इब्न-ए-इंशा

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