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निगाहों से अदा होते हैं!
हाल-ए-दिल मुझ से न पूछो मिरी नज़रें देखो, राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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ख़ुद अपनी दवा होते हैं!
हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वाले, दर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं!
यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं, मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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मुझे तलाश है सुनहरे हिरण की !
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…
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तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता!
मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है, कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता| बशीर बद्र
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हज़ारों शेर मेरे सो गए!
हज़ारों शेर मेरे सो गए काग़ज़ की क़ब्रों में, अजब माँ हूँ कोई बच्चा मिरा ज़िंदा नहीं रहता| बशीर बद्र
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पंटर चला गया!
बीता दिन पंटर का आखिरी दिन था| पिछले 15 वर्ष हमारे साथ बिताने के बाद हमारा प्रिय पंटर आखिर चला गया| एक महीने का था जब हमारे पास आया था, जब हम एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना में थे| दिल्ली में बेटे ने अपने एक मित्र से उसको लिया था और वहाँ से अपनी पहली रेल…
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मिलने में हमेशा फ़ासला रखना!
बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना, जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता| बशीर बद्र
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तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है !
तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं, तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई| बशीर बद्र