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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Feb 2023

    अफ़्सानों की क़िंदीलें हैं!

    अफ़्सानों की क़िंदीलें हैं अन-देखीं मेहराबों में, लोग जिसे सहरा कहते हैं दीवानों की बस्ती है| राही मासूम रज़ा

  • 9th Feb 2023

    लेकिन आग बरसती है!

    दिल की खेती सूख रही है कैसी ये बरसात हुई, ख़्वाबों के बादल आते हैं लेकिन आग बरसती है| राही मासूम रज़ा

  • 9th Feb 2023

    ये चीज़ तो ख़ैर अब सस्ती है!

    दिल जैसा अन-मोल रतन तो जब भी गया बे-राम गया, जान की क़ीमत क्या माँगें ये चीज़ तो ख़ैर अब सस्ती है| राही मासूम रज़ा

  • 9th Feb 2023

    प्यासों की इक बस्ती है!

    रंग हवा से छूट रहा है मौसम-ए-कैफ़-ओ-मस्ती है, फिर भी यहाँ से हद्द-ए-नज़र तक प्यासों की इक बस्ती है| राही मासूम रज़ा

  • 9th Feb 2023

    मिलन!

    एक बार फिर से मैं आज छायावाद युग की एक प्रमुख कवियित्री स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| महादेवी जी ने अपनी रचनाओं में पीड़ा की बड़ी प्रभावी अभिव्यक्ति दी है| महादेवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है महादेवी वर्मा जी की…

  • 8th Feb 2023

    हर-ज़र्रा में अज़मत के गुलाब!

    उसने बोए दिल-ए-हर-ज़र्रा में अज़मत के गुलाबरेगज़ार उसके लहू से चमन आसा भी था॥ क़तील शिफ़ाई

  • 8th Feb 2023

    आह का अन्दाज़ दुआ-सा भी था!

    अपने ज़ख्मो का हमें बक्श रहा था वो सवाबउसकी हर आह का अन्दाज़ दुआ-सा भी था॥ क़तील शिफ़ाई

  • 8th Feb 2023

    सहराओ में घनघोर घटा सा भी था!

    गम के सहराओ में घनघोर घटा सा भी था,वो दिलावर जो कई रोज़ का प्यासा भी था॥ क़तील शिफ़ाई

  • 8th Feb 2023

    दिल धड़का हम समझे वो आए है!

    रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है,अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है॥ क़तील शिफ़ाई

  • 8th Feb 2023

    दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं!

    तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं,एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं॥ क़तील शिफ़ाई

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