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मेरे ही साथ डूब गया!
अजब हरीफ़ था मेरे ही साथ डूब गया, मिरे सफ़ीने को ग़र्क़ाब देखने के लिए| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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ख़्वाब देखने के लिए!
उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए, कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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उदारीकरण!
आज एक बार फिर से मैं श्रेष्ठ कवि श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – काट लेना पेड़ बरगद का ख़ुशी सेनाश या निर्माण कर, अधिकार तेरा…
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शर्मिंदगी बढ़ जाएगी!
बेवफ़ाई खेल का हिस्सा है जाने दे इसे, तज़्किरा उससे न कर शर्मिंदगी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना
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नमी बढ़ जाएगी!
आप के हँसने से ख़तरा और भी बढ़ जाएगा, इस तरह तो और आँखों की नमी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना
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दुश्मनी बढ़ जाएगी!
इतनी चाहत से न देखा कीजिए महफ़िल में आप, शहर वालों से हमारी दुश्मनी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना
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ज़िंदगी बढ़ जाएगी!
मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर, आपके आने से थोड़ी ज़िंदगी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना
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रौशनी बढ़ जाएगी!
मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी, माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना
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प्यार तुम्हें दे सकता हूँ!
आज एक बार फिर से मैं प्रसिद्ध राजनेता और कवि श्री उदय प्रताप सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने पहले भी उल्लेख किया है उदय प्रताप जी एक श्रेष्ठ कवि होने के अलावा स्वर्गीय मुलायम सिंह जी के गुरू भी रहे हैं| उदय प्रताप जी की कुछ कविताएं मैंने पहले…