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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Aug 2023

    इंक़लाब-ए-पैहम है!

    इसमें ठहराव या सुकून कहाँ, ज़िंदगी इंक़लाब-ए-पैहम* है| *Continuous struggle फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 21st Aug 2023

    गुनाह-ए-आदम है!

    उसके शैतान को कहाँ तौफ़ीक़, इश्क़ करना गुनाह-ए-आदम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 21st Aug 2023

    तेरी ख़ुशी मुक़द्दम है!

    अपने ग़म का मुझे कहाँ ग़म है, ऐ कि तेरी ख़ुशी मुक़द्दम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 21st Aug 2023

    दिवाना हो गया है!

    किसी ने देखे हैं पतझड़ में फूल खिलते हुए, दिल अपनी ख़ुश-नज़री में दिवाना हो गया है|     इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 21st Aug 2023

    परिंद अपने परों का!

    फ़ज़ा-ए-शौक़ में उसकी बिसात ही क्या थी, परिंद अपने परों का निशाना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 21st Aug 2023

    झोंका बहाना हो गया है

    हमें तो ख़ैर बिखरना ही था कभी न कभी, हवा-ए-ताज़ा का झोंका बहाना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 21st Aug 2023

    कला!

    आज एक बार फिर से मैं अपनी तरह के एक अनोखे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|   भवानी दादा बातचीत के लहज़े में बहुत सहज रूप से गहरी बात कह देते थे| भवानी दादा की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है…

  • 21st Aug 2023

    कोई चराग़ सफ़र पर!

    चमक रहा है उफ़ुक़ तक ग़ुबार-ए-तीरा-शबी, कोई चराग़ सफ़र पर रवाना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2023

    ज़माना हो गया है!

    बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है, उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2023

    मेहराब देखने के लिए!

    कहाँ है तू कि यहाँ जल रहे हैं सदियों से, चराग़ दीदा ओ मेहराब देखने के लिए| इरफ़ान सिद्दीक़ी

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