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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Mar 2023

    तुमने मुझे बर्बाद किया!

    मुझको तो होश नहीं तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया!

    मेरी हर साँस है इस बात की शाहिद ऐ मौत, मैंने हर लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    मुझसे कुछ इरशाद किया!

    इतना मानूस हूँ फ़ितरत से कली जब चटकी, झुक के मैंने ये कहा मुझसे कुछ इरशाद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    बहुत देर में बर्बाद किया!

    इसका रोना नहीं क्यूँ तुम ने किया दिल बर्बाद, इसका ग़म है कि बहुत देर में बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    क्या आपने इरशाद किया!

    ऐ मैं सौ जान से इस तर्ज़-ए-तकल्लुम के निसार, फिर तो फ़रमाइए क्या आपने इरशाद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    जब चली सर्द हवा!

    दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया!

    वो करें भी तो किन अल्फ़ाज़ में तेरा शिकवा, जिनको तेरी निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    उसने ये इरशाद किया!

    सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उसने ये इरशाद किया, जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया| जोश मलीहाबादी

  • 3rd Mar 2023

    कूद पड़ी हंजूरी कुएँ में!

    एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक मार्मिक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| इस कविता में हमारे हृदयहीन सिस्टम का सटीक चित्रण किया गया है| सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता…

  • 2nd Mar 2023

    अब शम्अ जलाऊँ किसके लिए!

    मुद्दत से कोई आया न गया सुनसान पड़ी है घर की फ़ज़ा, इन ख़ाली कमरों में ‘नासिर’ अब शम्अ जलाऊँ किसके लिए| नासिर काज़मी

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