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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Aug 2023

    मसीहा की नज़र से!

    गिर जाओगे तुम अपने मसीहा की नज़र से, मर कर भी इलाज-ए-दिल-ए-बीमार न माँगो| क़तील शिफ़ाई 

  • 31st Aug 2023

    तलवार न माँगो!

    यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो, अपने ही गले के लिए तलवार न माँगो| क़तील शिफ़ाई 

  • 31st Aug 2023

    ज़ख़्म न जाने मेरे!

    चारा-गर* यूँ तो बहुत हैं मगर ऐ जान-ए-‘फ़राज़’, जुज़ तिरे** और कोई ज़ख़्म न जाने मेरे|     *Doctors, *ExceptYou अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2023

    अहद-ए-वफ़ा ने मेरे!

    तू है किस हाल में ऐ ज़ूद-फ़रामोश* मिरे, मुझको तो छीन लिया अहद-ए-वफ़ा ने मेरे| *भुलक्कड़ अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2023

    बात सुन ली है मिरी!

    काश औरों की तरह मैं भी कभी कह सकता, बात सुन ली है मिरी आज ख़ुदा ने मेरे| अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2023

    दिल को दुखाने मेरे!

    काश तू भी कभी आ जाए मसीहाई को, लोग आते हैं बहुत दिल को दुखाने मेरे| अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2023

    अश्रु आचमन!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – अगर शपथ की परिधि न होतीमेरी पीरकथा हो जाती पिंजरे का…

  • 30th Aug 2023

    फिर पुकारा है तुझे!

    काश तू भी मेरी आवाज़ कहीं सुनता हो, फिर पुकारा है तुझे दिल की सदा ने मेरे| अहमद फ़राज़

  • 30th Aug 2023

    होते थे ज़माने मेरे!

    आज इक और बरस बीत गया उसके बग़ैर, जिसके होते हुए होते थे ज़माने मेरे| अहमद फ़राज़

  • 30th Aug 2023

    ये भी ख़ज़ाने मेरे!

    लुट के भी ख़ुश हूँ कि अश्कों से भरा है दामन, देख ग़ारत-गर-ए-दिल* ये भी ख़ज़ाने मेरे| *लुटे हुए दिल अहमद फ़राज़

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