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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Mar 2023

    हाथ पसारे जब ख़ुद्दारी रहती है!

    पाँव कमर तक धँस जाते हैं धरती में, हाथ पसारे जब ख़ुद्दारी रहती है| राहत इंदौरी

  • 15th Mar 2023

    तबीअत भारी भारी रहती है!

    जब से तूने हल्की हल्की बातें कीं, यार तबीअत भारी भारी रहती है| राहत इंदौरी

  • 15th Mar 2023

    ज़िम्मेदारी रहती है!

    रात की धड़कन जब तक जारी रहती है, सोते नहीं हम ज़िम्मेदारी रहती है| राहत इंदौरी

  • 15th Mar 2023

    और मैं लाचार पति, निर्धन!

    आज एक बार फिर से मैं, मेरे लिए बड़े भाई और गुरु तुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इस नवगीत में बेचैन जी ने निम्न मध्य वर्ग के एक साधारण व्यक्ति की मजबूरियों को उजागर किया है| बेचैन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की…

  • 14th Mar 2023

    मुझे ताज-ओ-तख़्त ख़ुदा न दे!

    मैं ग़ज़ल की शबनमी आँख से ये दुखों के फूल चुना करूँ, मिरी सल्तनत मिरा फ़न रहे मुझे ताज-ओ-तख़्त ख़ुदा न दे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    कहीं ग़म की आग घुला न दे!

    मिरे साथ चलने के शौक़ में बड़ी धूप सर पे उठाएगा, तिरा नाक नक़्शा है मोम का कहीं ग़म की आग घुला न दे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    मुझे इतनी सख़्त सज़ा न दे!

    मैं उदासियाँ न सजा सकूँ कभी जिस्म-ओ-जाँ के मज़ार पर, न दिए जलें मिरी आँख में मुझे इतनी सख़्त सज़ा न दे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    कोई लहर आ के मिटा न दे!

    ज़रा देख चाँद की पत्तियों ने बिखर बिखर के तमाम शब, तिरा नाम लिक्खा है रेत पर कोई लहर आ के मिटा न दे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    इन्हें नफ़रतों की हवा न दे!

    नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं, ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    कहीं तेरा हाथ जला न दे!

    मिरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे, ये चराग़ फिर भी चराग़ है कहीं तेरा हाथ जला न दे| बशीर बद्र

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