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यक़ीं आ जाएगा पलकों
मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना, यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है| बशीर बद्र
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बहुत ख़ामोश बैठा है!
उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है, परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है| बशीर बद्र
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गुज़रना है गुज़र जाएगी
वक़्त नदियों को उछाले कि उड़ाए पर्बत, उम्र का काम गुज़रना है गुज़र जाएगी| निदा फ़ाज़ली
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कुंठा!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक प्रतिष्ठित कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत जी को उनके द्वारा आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ के लिए विशेष ख्याति मिली थी| दुष्यंत जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए…
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तिरी राय बदल जाएगी
मेरी ग़ुर्बत को शराफ़त का अभी नाम न दे, वक़्त बदला तो तिरी राय बदल जाएगी| निदा फ़ाज़ली
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ये हँसी भीग के!
हँसते हँसते कभी थक जाओ तो छुप के रो लो, ये हँसी भीग के कुछ और चमक जाएगी| निदा फ़ाज़ली