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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Dec 2025

    राजे ने अपनी रखवाली की!

    आज एक बार फिर मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निराला जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह कविता- राजे ने अपनी रखवाली की;किला बनाकर रहा;बड़ी-बड़ी फ़ौजें रखीं…

  • 7th Dec 2025

    जवानी की दोशीज़गी!

    जवानी की दोशीज़गी का तबस्सुम,गुल-ए-ज़ार के वो खिलाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Dec 2025

    शब-ए-मह की वो!

    शब-ए-मह की वो ठंडी आँचें वो शबनम, तिरे हुस्न के रस्मसाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Dec 2025

    याद आने की रातें!

    वो चुप-चाप आँसू बहाने की रातें,वो इक शख़्स के याद आने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Dec 2025

    काएनात रह जाए!

    मैं डूब जाऊँ समुंदर की तेज़ लहरों में,किनारे रक्खी हुई काएनात रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    आँखों में रात रह जाए!

    मैं सो रहा हूँ तिरे ख़्वाब देखने के लिए,ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    तिरे बदन का कोई!

    अब इस के बा’द का मौसम है सर्दियों वाला,तिरे बदन का कोई लम्स साथ रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    बिछड़ भी जाएँ तो!

    कुछ इस तरह से मिलें हम कि बात रह जाए,बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हात रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी की लिखी प्रसिद्ध ‘राष्ट्र-वंदना’ प्रस्तुत कर रहा हूँ – मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीरसौ-सौ नमन करूं मैं भैया सौ सौ नमन करूं! आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ********

  • 7th Dec 2025

    आसमानों से उतारे तो!

    चाहे कितनी भी बुलंदी पे चला जाए कोई,आसमानों से उतारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी

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